#G3

कौन कहता है ख़ामोशी बदग़ुमां है,
ज़रा ग़ौर से सुनिये इसकी अपनी ज़ुबां है, 

मेरे दिल में जो जगह है वो कब्ज़ा किये है,
बहुत उसे गुमनाम इस बात का गुमाँ है,

उसके पहलू में कभी मेरी भी शामो सुबह थी,
मेरे माथे पे होठों का उसके आज भी निशाँ है,

वो लरज़िस उसके होठों की भूलूँ तो कैसे मैं,
मेरे होठों पे वो लरज़िस आज भी ऩुमा है… ग़ुमनाम

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