इक रोज़ संग साथ बैठे बैठे
कलम कागज़ और कीबोर्ड बतिया बैठे

अपनी श्रेष्ठता के मद में कीबोर्ड चूर चूर था 
लजाया सा सकुचाया सा कलम कागज़ समेटे था

कीबोर्ड फरमाया-
तुम्हारा काम क्या है जो तुम इधर से उधर बिखरते हो
हमें देखो टंकण के बाद नापतौल के शब्द निकालते हैं
हमारा राज्य है समृद्ध सभी लाइन लगाते है
ज़रा सा हमसे मिलने को सभी बेताब रहते हैं

कहा फिर कीबोर्ड से –

कागज़ के गले लग के कलम ने
सही कहते हो भैया तुम, मदद करते तुम्हारी हैं
हमें भी गैर ना समझो हम भी तो तुम्हारे है

हमें देखो हम लिखने वाले की छुवन समेटे हैं
तुम तो यहीं रखे रहते हो हम सीने से लगते हैं

तुम तो यहीं रखे रहते हो हम सीने से लगते हैं

आभा चन्द्रा

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