हाथों की लक़ीरों ने क्या खेल दिखाया,
जिनसे न मोहब्बत थी हमें उनसे मिलाया।

हाथों में नहीं दम पांवों भी थके हैं, 
क्यूँ हमनवा मेरा मेरे सामने आया।

उन शोख हसीनों से ज़रा जाकर कोई पूछे,
तन्हाई में अपनी न कभी उनको बुलाया।

उसने मुझे देखा था यूँ शोख निगाहों से,
जैसे किसी साकी ने मुझे जाम पिलया।

 

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2 comments on “Tanhayi Shayari, Ghazal in Hindi

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    very beautiful lines… especially “Matlaa” is too good.

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      thank you so much for the appreciation…

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