हसरत अभी बाकी है कुछ शाम अभी बाकी है,
तेरे होठों पे थिरकती हुयी ग़ज़ल लगती है यूँ, 

ग़ुमनाम मयकदे में हूँ, और जाम अभी बाकी है, 

तेरी नज़रें न झुका, ज़रा सुरूर तो छाने दे,
मैं होश में हूँ मुझ पर, ये इल्ज़ाम अभी बाकी है,

करता हूँ इस्तकबाल तेरा दिल के हरम में मैं,
कि इस दिल में दिल के अरमान अभी बाकी है,

ऐ बेवफा इतनी तो बावफाई कर मेरे साथ,
मिलने आ फिर एक बार, चाहे आख़िरी बार,

मेरे इस दुखते दिल में जान अभी बाकी है… ग़ुमनाम

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