हमारी आँख में रह कर भी हमसे दूर कितने हैं
उनके पास होकर भी हम मजबूर कितने हैं
दिल धड़कता है तो आवाज़ गुंजती है
उनकी याद में रहकर के हम खामोश इतने हैं

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