ग़र इश्क है तो इश्क का मिलना जरुरी है,
दिल किसी पे आये,तो मचलना जरुरी है,

दौर-ए-जवानी में अक्सर,फिसलता है मन, 
जवानी की दहलीज़ पे,संभालना जरुरी है,

कंही बुझ न जाये दिल में,चाहत के दिये,
इश्क का चिराग दिल में,जलना जरुरी है,

रुका हुआ पानी,यू भी हो जाता है ख़राब,
जिंदगी में कुछ पाने को, चलना जरुरी है,

वक़्त का तकाज़ा है,कि संभल जाये हम,
ज़माने के साथ ख़ुद को,बदलना जरुरी है,
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मनोज सिंह”मन”

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