मैने छोड़ा है शहर,एक कसम के लिये,
कोई बदनाम न हो जाये,कंही मेरे लिये,

तुम से मिल के,फिर कभी मेरा न रहा, 
दिल बेईमान हुआ मेरा,सनम तेरे लिये,

करो वादा आने का फिर,झूठा ही सही,
ये जरुरी है सनम, मेरे जीने के लिये,

इतनी चाहत है ग़र,तो ये दुरिया क्यों है,
क्यों जरुरी है बिछुड़ना,मिलने के लिये,

तुम्हें पसंद रही है,उजालों से भरी रातेँ,
आशियाँ अपना जलाया,मैने तेरे लिये,

साथ रहता है अब मेरे,एक टुटा हुआ दिल,
तुम ने ही माँगा था कभी,खेलने के लिये,
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मनोज सिंह”मन

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