चाँद भी शरमाता है, यूँ देख के तेरा बाँकपन,
गैरों से तो ठीक है, अपनों से कैसा परदापन,

जाने कब जानोगी तुम, प्यार है ये जन्मों का, 
पागल तुम्हें भी कर देगा, ये मेरा दीवानापन,

मिलो कभी जब राहों में, देखा करो प्यार से,
कंही मार ना डाले एकदिन, ये तेरा बैगनापन,

माँगा है तुमको ख़ुदा से, तुम ही हो मेरे सनम,
औरों का हमको पता नही, तुमसे है अपनापन,

ख्वाहिश बस इतनी सी है, कोई हमारा हो यंहा,
आ जाओ दूर कर दो, तुम मेरे दिल का सूनापन.
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मनोज सिंह”मन

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