जिससे लिखा था तेरा नाम कभी ~
वो रंग उड़ने लगा है अब दिल की दीवारों से ।

नहीं अच्छे लगते उन वादों जैसे दिन,
कहां गए वो फरिश्ते जिन्होंने वादे किए थे।

मैं शायर तो नही, करता हूँ शायरी तेरी याद में
मेरे कदमो में ज़न्नत तो नही, लेकिन तेरी मोहबत किसी ज़न्नत से कम तो नही.
-Nisha nik.

जिन्दगी भी बङी कमबख्त चीज है
मिलती तो एक बार है पर रूलाती बार-बार है
-Nisha nik.

होठो पे हंसी सजाये रखना दिल में सदा सकून रखना
ना जाने कब खुदा की रहम हो जाये और तख़्तो ताज पर हमे सजाये ।

Nisha nik

दर्द में हम गाते है, लोगो को अपने नगमे हम सुनाते है
हम लिखते है तुम्हारी याद में और लोग हमे  शायर कह जाते है।

 

किस पर क्या गुजरी किसी को क्या खबर
कुछ नहीं मिलता किसी को अपना हाल सुना के।

उस दिन रह जाएंगे हम अकेले हमेशा के लिए
जिस दिन हो जाओगे तुम किसी के सदा के लिए।

खुशियाँ तो आजकल बोतलों में बंद हो गयी है दोस्तों
गम जब बढ़ जाता है तो खरीद लाते हैं।

मुझे तूझसे कोई सिकवा नही
तेरे दरद को श्यारी बना दिया

मैंने भी अपने हारे मुकदर को
तेरी याद में जीत का सिकंदर बना दिया

-Nisha nik.

पिला दे कितनी भी साक़ी फिर भी
रह जाती है क़सक बाक़ी फिर भी

–सरु

वो मज़ा ए तड़प कहाँ ग़र सब एक साथ मिल जाय,
ग़ुमनाम किश्तों मे मरने का मज़ा ही कुछ और है… ग़ुमनाम

ऐ अन्ज़ान,
जब से वकालत में आया हूँ, मेरी नींद भी अजीब हो गई है,
रात भर आती नही, और दिन भर जाती नही।

ऐ अन्ज़ान,
इस वकालत के पेशे में हर तरीका हमने आजमा के देखा है,
जो किस्मत से नही मिलते, वो किसी कीमत पर नही मिलते।

आँखो में मेरे शराब है
पुरा बदन शब्ब है
अगर चाहत हो हुजूर को होठो से जाम चकने की
मयखाना -ए -शब्ब तैयार है।

तुम ने चाहत भरी नजरो से देखा हमें
हम गलत समझ बैठे
तुम्हारे इस दिल लगी को मोहब्बत समझ बैठे।

कभी पास बैठ कर गुजरा कभी दूर रह कर गुजरा
लेकिन तेरे साथ जितना भी वक्त गुजरा बहुत खूबसूरत गुजरा ।

मायूस हो गया हूँ जिंदगी के सफर से इस कदर
कि ना खुद से मिल पा रहा हूँ ना मंजिल से।

थम जा ऐ वक्त आज यही पर,
फिर ना जाने कब उनसे मुलाकात होगी।

खुदाया क्या खूब हुनर पाया है उन्होंने ख़ामोशी का,
ग़ुमनाम, वो लब भी नहीं हिलाते और दास्ताँ हो जाती है… ग़ुमनाम