कोशिश बहुत की राज़-ए-मुहब्बत बयाँ न हो,
मुमकिन कहाँ था की आग लगे और धुँआ न हो…

याददाश्त की दवा बताने में सारी दुनिया लगी है,
तुमसे बन सके तो तुम हमें भूलने की दवा बता दो…

आशिकों ने ही दिया है तुझको ये मुकाम गज़ब का,
वरना, ऐ इश्क तेरी दो कौड़ी की औकात नहीं…

अच्छा करते हैं वो लोग जो मोहब्बत का इज़हार नहीं करते,
ख़ामोशी से मर जाते हैं मगर किसी को बदनाम नहीं करते…

तुझे मेरी याद नहीं आती तो ना आए,
बस मुझे तेरी याद आती ये तुझे पता चल जाए…

इसलिए भी खामोश रहने लगा हूँ मैं,
क्योंकी उस पर मेरी बात का अब असर नहीं होता…

इतनी मुश्किल भी ना थी राह मेरी मुहब्बत की,
कुछ ज़माना खिलाफ हुआ कुछ वो बेवफा हो गए…

तू अगर इश्क़ में बर्बाद नही हो सकता,
जा तुझे कोई सबक याद नही हो सकता…

दिल भी आज मुझे ये कह कर डरा रहा है,
करो याद उसे वरना मैं भी धडकना छोड़ दूंगा…

याददाश्त की दवा बताने में सारी दुनिया लगी है,
तुमसे बन सके तो तुम हमें भूलने की दवा बता दो…

जिसकी वजह से हम बदनाम हुये हैं शहर में यारो,
उस शक़्स को आज तक हमने करीब से देखा तक नहीं…

तलब मौत की करना गुनाह है ज़माने में यारो,
मरने का शौक है तो मुहब्बत क्यों नहीं करते…

काश! कि वो लौट आयें मुझसे यह कहने,
कि तुम कौन होते हो मुझसे बिछड़ने वाले…

बड़ी तब्दीलियाँ आईं हैं अपने आप में लेकिन,

तुझे याद करने की वो आदत नहीं गयी…