तुझे याद ना करू तो जिस्म टूटता है मेरा फ़राज़
उम्र गुजरी है तेरी याद का नशा करते करते…

ऐ अन्ज़ान उससे कह दो कि,
मोहब्बत नही आती, पर रहम तो आता होगा ना?

ऐ अन्ज़ान,
आओ कुछ देर मेरी चाहत की छाँवों में आराम कर लो,
बहुत थक गये होगें ना मुझसे नफरत करते करतें।

ऐ अन्ज़ान उससे कह दो कि मेरी सजा कुछ कम कर दें,
हम पेशे से वकील है मुज़रिम नही,
बस हमसे गलती से ईश्क हो गया था।

Aap k chehare ki muskaan p to sab fida the….
Hume to aapki aankho k piche k aansuo ne dewaana kar Diya….
Yu to hum bhi jaante the aapka milna humari kismat m nahi…
Par Saale harami dil ne hi haar maanne se inkaar kar Diya….

‘ग़ज़ब’ की ‘एकता’ देखी “लोगों की ज़माने में” … !
‘ज़िन्दों’ को “गिराने में” और ‘मुर्दों’ को “उठाने में” … !!

आईने के पीछे रहकर हासिल न कुछ तुम्हे होगा,
सामने आओ आईने के हकीक़त से सामना होग।

मौत से जितना डरोगे उतना ही डराएगी, Read more

नसीब इन्सान का चाहत से ही सँवरता है
क्या बुरा इसमें किसी पर जो कोई मरता है
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हाल-ए-दिल ना पूछ भरी महफ़िल में कि उदास क्यों हूँ,   Read more

ना लफ़्ज़ों का लहू निकलता है ना किताबें बोल पाती हैं,
मेरे दर्द के दो ही गवाह थे और दोनों ही बेजुबां निकले…

तुम मुझे छोड़ कर जाओगी तो मर जाऊँगा
यूँ करो, जाने से पहले मुझे पागल कर दो…

 

यकीन है के ना आएगा मुझसे मिलने कोई,
तो फिर ये दिल को मेरे इंतज़ार किसका है…

ऐसा लगता ज़िन्दगी तुम हो
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो।

अब कोई आरज़ू नहीं बाकी  Read more

वो हाथ कुछ अजीब से लगते हैं किसी और के हाथों में,
जिन हाथों की चूड़ियाँ कभी टूटी थी मेरे ही हाथों में…

Kabhi Sajday,Kabhi Aansu,, Hazaroon Koshisen, Lekin
Jo Kismat Main Nahi Likha Woh Ronay Se Nahi Milta..

Atul Azamgarhi

वो मेहँदी के हाथ दिखा के रोई,
किसी और की होने जा रही हूँ मैं ये बता के रोई ,
कह रही थी की न जी पाऊँगी तुम्हारे बिन,  Read more

हर किसी के नसीब में कहाँ लिखी हैं चाहतें,
कुछ लोग दुनिया में आते हैं सिर्फ तन्हाईयों के लिए…

मैं जो चाहूं तो अभी तोड़ लूँ नाता तुम से,
पर मैं बुजदिल हूँ मुझे मौत से डर लगता है…

मेरी खताओं की सजा अब मौत ही सही, इसके सिवा तो कोई भी अरमान नहीं है,
कहते हैं वो मेरी तरफ यूं उंगली उठाकर, इस शहर में तुमसे बड़ा बदनाम नहीं है…

लब ये कहते हैं कि चलो अब मुस्कुराया जाये,
सोचती हैं आखे, दिल से दगा कैसे किया जाये?

नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की
पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की।