ऐ अन्ज़ान,
तुम मेरे ऊपर कोई इल्ज़ाम मत लगाओ,
मैने तुम्हें चाहा था यही इल्ज़ाम बहुत है।

क्या खूब  गुजरी हमारे साथ भी
दुनिया वाले प्यार मोहब्बत ऐशोआराम पाने को तरसते है
और हम
गैरो का तो छोड़ो अपनो का ही भरोसा पाने के लिए तरस गये।

इज़हार क्यों किया था, इकरार क्यों किया था,
जब जाना बहुत दूर, फिर प्यार क्यों किया था,

ना थी कोई रंजिश, और ना थी कोई शिकायत,
जब हार गया दिल तुझपे, ये वार क्यों किया था.
~ मनोज सिंह “मन”

आज तक सब खोया ही खोया था, बस एक तुम्ही को पाया है
और तुम भी अलविदा कह गये ये कहकर की छोड़ो सब मोह माया है
तुम क्या जानो क्या हालत हो गई है इस दिल की,
जो पूरी रात तुम्हारी याद मे रोया है।
ना मिलता है सुबह शुभ दिन का संदेश तुम्हारा ना रात में तुम्हारे ख्वाबों का साया है
आखिर ऐसी क्या वजह है जो तुम्हें ये लगने लगा की सब मोह माया हैं।

मैने जब भी चाहा कि हाले दिल कहूं तुझसे
तू किसी और की बातों में ही उलझा मिला..
आभा….

चोट पत्थर से ही लगे ये जरूरी तो नही है
उनकी बेगानी निगाह भी ये काम करती है
आभा…

इतना खुदगर्ज़ भी नही हुआ, तेरे जाने बाद,
कि तेरी यादों को भी, अब दिल से निकाल दूँ.
~ मनोज सिंह”मन”

कह गयी मुझसे उनकी वो जुंबिशे नज़र
ब़ाकी जो ईश्क था अब खत्म हो गया…..
आभा….

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जायेगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा

तुम्हे ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा  Read more

मुद्दतों जिसकी याद में आंख की नमी ना गयी
उसकी ही बातें आज हमें मतलबी ठहरा गयी…..
आभा….

हुये दरबार में हाज़िर अगर पैग़ाम से पहले
हुआ है सर क़लम मेरा किसी इल्ज़ाम से पहले

ईश्क हम आज भी तुझे बेपनाह करते है
तेरा इंतजार बस अब नहीं करते है….
आभा….

इस बात पर यक़ीं को दिल तैयार ही नहीं था
सौदा था व्यापार मेरा वो प्यार ही नहीं था

उसे पाना, उसे खोना, उस के हिज्र (याद ) में रोना,
यही अगर इश्क़ है “मोहसिन” तो हम तनहा ही अच्छे है.

तुम मुझ पर लगाओ मैं तुम पर लगाता हूँ,
ये ज़ख्म मरहम से नही इल्ज़ामों से भर जायेंगे. ~a~

Tumhare ishq Ki nilaami k asli hakdaar to hum the,
phir Kyu tumne Hume isse dur kar diya……..
Is kahani m jo kissa sabse bura Tha,
tumne use hi kyo mashoor kar diya…

तुम क्या जानो ए साहिबा के कितना प्यार तुमसे करते है
दीदार पाने को तुम्हारा हर दिन हम दुआएं हजार करते है
क्यू तुम हमसे यू रूठे रूठे रहते हो  Read more

किस्मत ने साथ छोड़ा तो पानी की बूँद के लिए तरस गये
मोहसिन
वरना एक जमाना ऐसा था लोग रो रो के आंसू पिलाते थे…

कितने झूटे थे हम मोहब्बत में
आज तू भी जिन्दा है और में भी

जिस्म का दिल से अगर वास्ता नहीं होता !
क़सम खुदा की कोई हादसा नहीं होता !…