कचरे का ढेर दरीचे में रख छोड़ा है मैनें
इन आँधियों का गुरूर कुछ यूँ तोड़ा है मैनें

–सुरेश सांगवान’सरु’

बहती धारा के साथ बहो किनारा छोड़ दो
रखो यकीं खुद पे दुनियाँ का सहारा छोड़ दो

—-सुरेश सांगवान’सरु’

हुई शब तो चाँद -सितारों को पहरेदार किया
उतर के पानी में दरिया को खुद ही पार किया
—-सुरेश सांगवान ‘सरु’

देखें हवाएँ ले चलें अब कहाँ तक मुझे
मजबूरियों ने चलाया है यहाँ तक मुझे
-सुरेश सांगवान’सरु’

नहीं आसां नहीं है यहाँ सम्भल जाना
ज़िंदगी नहीं है मौसम का बदल जाना
—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

मंज़िल होगी आसमाँ ऐसा यकीं कुछ कम है
अपने नक्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

—-सुरेश सांगवान’सरु’

ना पूछो के मंजिल का पता क्या है,
अभी बस सफर है सफर का दीदार  होने दो…

हमें परवाह नहीं की जीत  हमारी है या हार, Read more

रूठ जाये अगर तक़दीर तो मनाकर देखो
फूल मेहनत के हथेली पर उगाकर देखो

—–सुरेश सांगवान’सरु’

रिवाज़ न हो भले ही पढी किताबें पढने का//
जिंदगी के सीखे सबक रोज़ याद करने होते है//
आभा….

क्या हार में क्या जीत में किंचित नही भयभीत में,
कर्तव्य पथ पर जो भी मिले जीत भी सही और हार भी सही !

जन्म लिया है तो सिर्फ साँसें मत लीजिये, जीने का शौक भी रखिये..
शमशान ऐसे लोगो की राख से.. भरा पड़ा है
जो समझते थे…कि दुनिया उनके बिना चल नहीं सकती ?
अतुल अंज़ान

आगे चलके वकालत मे कुछ इस तरह बूनूंगा कानून के धागे,
कि अच्छे-अच्छे जजों को झुक जाना पड़ेगा मेरे आगे।
-अतुल यादव
एल-एल.बी.