परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता

बडे लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना  Read more

ए फलक़ कभी देख तो आके ज़मीन पे
कैसे-कैसों को इसने संभाल रखा है

—-सुरेश सांगवान’सरु’

यादों को मिटाकर हक़ीक़त कर दो सनम
आओ पास आओ क़यामत कर दो सनम

—सुरेश सांगवान’सरु’

साँस टूट चली है इक तुम तक आने में
अभी तो घर भी जाना है यहाँ से

—सुरेश सांगवान’सरु’

माँ रोते में मुस्कुराना तुमसे सीखा है
कारे दुनियाँ का ताना-बाना तुमसे सीखा है

गर्दिश-ए-दौरा तो आनी जानी शै  Read more

माँ ही गुरू माँ ही ज्ञान
ईश्वर का उत्तम वरदान

पाठशाला तू ही तो है  Read more

ख़ुदाया प्यार में यूँ बंदगी अच्छी लगी
रही मैं ना मैं मुझे बेखुदी अच्छी लगी

खलाएँ जीस्त की मेरी तमाम भर गई  Read more

इंतजार अब भी है तुम्हारा आज भी चाहत वही है।
माना कुछ गलतियां की है हमने मगर हम इन्सान बुरे नहीं है।

जहां तक हो सका हमने तुम्हें परदा कराया है
मगर ऐ आंसुओं! तुमने बहुत रुसवा कराया है

चमक यूं ही नहीं आती है खुद्दारी के चेहरे पर Read more

चांदनी क्यों इतराती है खुद पे इतना,
कंही छुप जाये मेहताब,तो क्या होगा,

कुछ रुका सा है,नाजुक सी पलकों में,  Read more

तुम हमेशा के लिए हमारे हो जाओ अब तो हर रोज बस दुआ यही करते हैं
एक तुम्ही हो जिस पर हम दिलो जान से मरते हैं
माना हम नहीं करते मोहब्बत अपनी लफ्जों मे बंया
लेकिन इतना समझ लो के बेइतंहा मोहब्बत तुमसे करते हैं।

बता दे यार मेरे तुझको प्यार है कि नही,
मेरे नसीब में भी कोई बहार है कि नही,

तेरी उम्मीद पे ठहरा हूँ मुद्दत से राहों में,  Read more

ना किसी की यादों ने सताया कभी
ना कभी दिल टूटा हैं
हमारा दिल तो वो पानी है दोस्तों
जो अपनी मस्ती मे बहता है
फिर भी ना जाने क्यू ख्याल आजकल किसी अजनबी का रहता है।

हौसलों की आज उड़ान देखिये
और सूरत-ए- आसमान देखिये

फूल पे बिखरी मुस्कान देखिये  Read more

जो भी मेरी ज़िंदगी में ख़ास रहा है
यूँ समझो मुहब्बत का अहसास रहा है

—–सुरेश सांगवान’सरु’

लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये
ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये

—-सुरेश सांगवान’सरु’

तुमको छोड़ के जिस दिन मैं, दूर कहीं चला जाऊँगा।
आँखों में… मैं बनके आँसु याद बहुत तुम्हें आऊँगा।
इन्दर गुन्नासवाला

यही है इल्म मिरा यही हुनर भी है
नहीं फसील-ए-अना यही गुज़र भी है

बसी है कहाँ इंसानियत जानूं हूँ  Read more

यादें तेरी भूलु कैसे मुझको तुम बतला जाओ,
बैठु में आँखें बंद करके और पास मेरे तुम आ जाओ।

जब सोंचु में तुमको ये दूरी मुझको डँसती है,
इस दूरी के मौसम को आकर के तुम झुठला जाओ।

-इन्दर गुन्नासवाला

तुझे इश्क़ कर के ये यक़ीन हुआ कि
इबादत
के लिए ख़ुदा का मिलना ज़रूरी नहीं है
आभा..