हौसलों की आज उड़ान देखिये
और सूरत-ए- आसमान देखिये

फूल पे बिखरी मुस्कान देखिये  Read more

अब्र की स्याही से लिखा लगता है,
भविष्य मेरे देश का,
कि जल कर ख़ाक हुआ जाता है, Read more

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं
जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी-चादर उठाते हैं

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते Read more

जहां को दिलवालों की कद्र करते किसने देखा है
किसी पत्थर को आख़िर आह भरते किसने देखा है

सदा से आते जाते हैं मौसम ये रुत बहारों की  Read more

इश्क़ में हमारी बे-ज़ुबानी देखते जाओ
उस पर आलम की तर्जुमानी देखते जाओ

तुम ना आओगे कभी मुन्तज़िर हम फिर भी हैं  Read more

ये मौत क्या दफन करेंगी हमारी सांसों को…
जब हमारी सांसों पर हमारा अधिकार ही न रहा…
हम बस कहते रहे कि हमें मुहब्बत नहीं उनसे…
और न जाने कब हमारे दिल पर हमारा इख्तीहार ही न रहा…

नजदीकियां तो हम भी बढ़ा लेते उनसे…
पर एक तरफा इश्क़ के खुमार का, नशा ही कुछ ओर था …
मेरे अजीब दोस्तों का तुम्हें भाभी कह के बुलाना और Read more

दिखाके इक झलक दिलबर इनायत कर दो
मिरे दिल पे आज कोई क़यामत कर दो
—सुरेश सांगवान’सरु’

कई राज दिल में है दफ़न ,
कई ख्याल दिल में जाग रहे ,
जो करते प्यार सचे दिल से ,
क्यूँ दूर दुखों से भाग रहे ,
उन्हें क्या पता यही मंज़िल है ,
आखिर यहीं पे तो आना है |

पास आने नहीं देते
मुस्कुराने नहीं देते

बोझ ज़िम्मेदारियों के Read more

कुछ नहीं रखा ए दोस्त हाथ की लकीरों में
इक उम्र बिताई है हमने भी फकीरों में
सुरेश सांगवान’सरु’

माना महरूम हुये है हम तेरी चाहत से,
मगर यकीं उठा नही है अभी मोहब्बत से,

जब भी दिख जाओगे कंही राहों में हमें, Read more

फूँक से सूरज बुझाना छोड़ दो
रेत की मुट्ठी बनाना छोड़ दो

हो नहीं सकता जहाँ दिल से मिलना  Read more

तेरी यादों को सिरहाने लगा कर सोयी थी मैं,
जब जागी तो सारा ज़हन महक रहा था…
आभा….

ज़र्रा ज़र्रा मेरा इंतज़ार करता है, कभी
तो सुनूं उन अनकही आयतों को
नाउम्मीद सी एक उम्मीद है बाक़ी बस
चुप सी लगी है इन ख़ामोश आँखों को
आभा..

ना पूछो के मंजिल का पता क्या है,
अभी बस सफर है सफर का दीदार  होने दो…

हमें परवाह नहीं की जीत  हमारी है या हार, Read more

ऐ अन्ज़ान ,
कल जो इश्क सस्ता बहुत मिला था,
आज वहीं इश्क महँगा भी बहुत पड़ा है।

ऐ अन्ज़ान,
तुम मेरे ऊपर कोई इल्ज़ाम मत लगाओ,
मैने तुम्हें चाहा था यही इल्ज़ाम बहुत है।

ऐ अन्ज़ान,
मेरी गलतियाँ,
मेरी कमियां,
मेरे सारे दोष,
अनदेखा कर देना।
क्योंकि मैं जिस शहर में रहता हूं,
उसे लोग आज़मगढ़ कहते हैं।

उन नादानियों के दौर से यूँ हम भी गुज़रे थे,
अब क्या बताये आपको कि कैसे बिखरे थे,

शिकवे शिकायत रूठना रोज़ की बात रही,  Read more