बता दे यार मेरे तुझको प्यार है कि नही,
मेरे नसीब में भी कोई बहार है कि नही,

तेरी उम्मीद पे ठहरा हूँ मुद्दत से राहों में, 
मेरी तरह तेरे दिल में इंतज़ार है कि नही,

लुटा दिये है तेरे प्यार में  मैने दोनों जँहा,
तू भी मुझपे इस तरह निसार है कि नही,

मेरी आँखों में तड़प है तुम से मिलने की,
दिल तेरा भी ऐसे ही बेकरार है कि नही.
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मनोज सिंह”मन”

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