बात जुबाँ पे ना सही, दिल में दबा रखना,
जगह थोड़ी सी सही, दिल में बना रखना,

गर,बात निकल आये, मेरी चाहत की कभी,
तुम,मेरी बर्बाद मोहब्बत की, अना रखना,

तुम , मुझे चाहो, न चाहो कोई बात नही,
बस,मेरी चाहत को, दिल में बसा रखना,

यंहा,मेरे नसीब में रहे, हज़ारों गम सही,
तुम आशियाना खुशियों का, सजा रखना,

“मन” बस तेरा था, तेरा है, तेरा ही रहेगा,
तुम,याद मेरी अपने दिल में, सदा रखना,
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मनोज सिंह”मन”

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