ए दिल जरा बता दे ,ये कैसे है मुनासिब,
कि प्यार भी हो जाये,बर्बाद भी न हो हम,

अबतक नही हुआ जो,वो चाहता है तू क्यों,
यूँ नाम भी हो जाये, बदनाम भी न हो हम,

लो चल दिया है वो तन्हा आज छोड़कर के,
मुमकिन न हमसे होगा,नाशाद भी न हो हम,

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“मन”
नाशाद~नाखुश

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