अभी नादाँ हु इश्क में, जताऊ कैसे,
प्यार कितना है, तुमसे बताऊ कैसे,

बहुत चाहत है, दिल में तुम्हारे लिये,
तुम ही कहो, तुम्हें अपना बनाऊ कैसे,

जो अगन मेरे दिल में है, तुम्हारे लिये,
वही आग तेरे दिल में भी, जलाऊ कैसे,

अब जीना अच्छा नही लगता, तेरे बिन,
बताओ आशियाँ तेरे संग, बसाऊ कैसे,

लिखे है कुछ ख़त मैने, बस तेरे लिये,
ये दिल के जज्बात, तुम्हे सुनाऊ कैसे,

“मन” कहता है, तुम ही हो मीत मेरे,
तुम ही कहो, तुमसे रिश्ता बनाऊ कैसे,
~~~~~~~~~~
मनोज सिंह”मन”

Facebook Comment

Internal Comment

Leave a Reply