आज से अब से  कोई  गीत  ऐसा  गाएँ  हम
चाहे गम मिले या खुशियां बस  मुस्कुराएँ हम

जब हदें  नहीं  कोई खुले इन आसमानों की
भरे  उड़ानें  हर  कोई  सारे पर फ़ैलाएँ हम

पाएँ ना  तन्हा खुद को ख्वाब ही क्यूँ ना हो
इक  दूजे  के दिल में ऐसे जगह बनाएँ हम

छोड़ दे अपना गुरूर  खिलते  हुए गुलाब भी
हंसते  हुये  चेहरों  से  चमन  सजाएँ  हम

कल  में आज  जैसी  बात रहे ना रहे दोस्तो
चलो गुज़रते हुए  इन लम्हों में जी जाएँ हम

सौ न सही दस ही सही मगर बुझने से पहले
दिल-दिल में चिराग़ मुहब्बतो के जलाएँ हम

टिक जाय गर आसमाँ में वो आफ़ताब ‘सरु’
सुहानी शाम चाँदनी रातें कैसे पाएँ हम

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4 comments on “आज से अब से कोई गीत ऐसा गाएँ हम…

  • Surender

    thanks a lot Amitabh ji,Anil ji and aakaasshhh ji…

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    beautiful creation

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    Nice one

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  • ~aakaasshhh~

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

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