आ रहा था मज़ा जिंदगी का हमें,
शौक भारी पड़ा आशिकी का हमें,

दूर हम से हमारा सनम है अभी,
अब नही होश इस बे-खुदी का हमें,

मै जँहा भी गया,साथ गम चल दिये,
छोड़ सारा जँहा,आज हम चल दिये,

जिस गली मै चला हर गली बंद थी,
जिंदगी हर दफा मुझ पे क्यों तंग थी,

साथ मिलता नही है किसी का हमें,
जिंदगी भर रहा गम इसी का हमें,

ये मेरे हर्फ़ इस दिल के जज्बात है,
अब सहारा है बस मौशिकी का हमें,
~~~~~~~
मनोज सिंह”मन”

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One comment on “आ रहा था मज़ा जिंदगी का हमें

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    पलकों को हमने,
    झुकने न दिया…
    तेरे खातिर हमने,
    जरा-सा मुस्कुरा दिया…
    .
    मेरी वफा को तुमने,
    इक पल में भुला दिया…
    जो किया दगा तुमने,
    तुझे खुद से मिटा दिया…
    .
    शीशा तोड़कर आशिकी का हमने,
    खुद को फिर अकेला कर दिया…
    मेरे इश्क को तुमने,
    इक मजाक बना दिया…
    #rahul_rhs

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