मेरी एक बघेली कविता—

पतोहिया बीए पास हइ।

एमे ओमे पास बताइ के, लड़िका के किन्हिन शादी, 
बीए पास पतोहिया आई, भइ लड़िका के बरबादी।
उ कुछु कहइ त समझि न पामा, जोर-जोर चिल्लानें,
रोजू-रोजू के लफड़ा देखिके, पापा पर खिसियानें।

कसिके कहिदं दुलही से के ओनका का अकरास हइ।
पतोहिया बीए पास हइ।

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