जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब,
गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब है।
कालाधन तो अब,आप जैसों से निकले हैं,
जो कि हर हाल में, देशहित में खराब है।

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One comment on “नोटबंदी/अमरेश गौतम

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    Great content! Super high-quality! Keep it up! 🙂

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