ग़ज़ल पर ग़ज़ल मैं तुझको सोचकर लिखती रही
मेरी  ज़िंदगी   तुझे   मैं   उम्र  भर  लिखती  रही

क़िताब- ए- हसरत और मेरे अश्क़ों की सियाही  Continue reading

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हालात  ही  बदले  न  खुद  को बदल पाये हम
समझी हमें दुनियाँ न उस को समझ पाये हम

किसको   फ़ुरसत  है  जो   बैठे   पूछे  दास्तां  Continue reading

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भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा
घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा
फिर याद बहुत आयेगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम  Continue reading
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खुश्बू-ए-गुल को हवाओं  से मिल जाने दे
रम  जाने दे ज़रा सा  और रम  जाने दे

दुनियाँ  से  ले जाएगा  ये रोग  इश्क़ का  Continue reading

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उस  पार वो  तो  जाके  इस  पार  देखते हैं
साहिल  पे  बैठे  हम  ही  मझधार  देखते हैं

ये जिंदगी हमारी उलझन का  सिलसिला है  Continue reading

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गुजरेगा यहीं से घर खुदा के रास्ता कोई
राह-ए-मुहब्बत में क्यूँ इतना सोचता कोई

रहा गुबार ही गुबार सहराओं में दूर तलक  Continue reading

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